श्री विष्णु पुराण  »  अंश 3: तृतीय अंश  »  अध्याय 5: शुक्लयजुर्वेद तथा तैत्तिरीय यजु:शाखाओंका वर्णन  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  3.5.14 
ब्रह्महत्याव्रतं चीर्णं गुरुणा चोदितैस्तु यै:।
चरकाध्वर्यवस्ते तु चरणान्मुनिसत्तम॥ १४॥
 
 
अनुवाद
हे मुनिसतम! जिन विप्रगणों ने गुरु की प्रेरणा से ब्रह्महत्या विनाशकव्रत का अनुष्ठान किया था, वे सभी व्रत के प्रभाव से यजुःशाखाध्यायी चरकध्वर्यु बन गये। 14॥
 
Hey Munisatam! Those Vipraganas who had performed the ritual of Brahmahatya Vinashakavrata with the inspiration of Guru, all of them became Yaju:Shakhadhyayi Charakadhwaryu due to fasting. 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)