श्री विष्णु पुराण  »  अंश 3: तृतीय अंश  »  अध्याय 5: शुक्लयजुर्वेद तथा तैत्तिरीय यजु:शाखाओंका वर्णन  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  3.5.12 
श्रीपराशर उवाच
इत्युक्तो रुधिराक्तानि सरूपाणि यजूंषि स:।
छर्दयित्वा ददौ तस्मै ययौ स स्वेच्छया मुनि:॥ १२॥
 
 
अनुवाद
श्री पराशरजी बोले - ऐसा कहकर महर्षि याज्ञवल्क्य ने रक्त से भरी हुई यजुर्वेद की मूर्ति उगलकर उसे दे दी; और स्वेच्छा से चले गए ॥12॥
 
Shri Parasharji said - Having said this, the great sage Yajnavalkya vomited out the idol Yajurveda filled with blood and gave it to him; And went away willingly. 12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)