श्री विष्णु पुराण  »  अंश 3: तृतीय अंश  »  अध्याय 4: ऋग्वेदकी शाखाओंका विस्तार  »  श्लोक 8-9
 
 
श्लोक  3.4.8-9 
ऋग्वेदपाठकं पैलं जग्राह स महामुनि:।
वैशम्पायननामानं यजुर्वेदस्य चाग्रहीत्॥ ८॥
जैमिनिं सामवेदस्य तथैवाथर्ववेदवित्।
सुमन्तुस्तस्य शिष्योऽभूद्वेदव्यासस्य धीमत:॥ ९॥
 
 
अनुवाद
उनमें से उस महामुनि ने पैल को ऋग्वेद, वैशम्पायन को यजुर्वेद और जैमिनी को सामवेद पढ़ाया और उन मतिमान व्यासजी का सुमन्तु नामक शिष्य अथर्ववेद का ज्ञाता हुआ ॥8-9॥
 
Among them, that great sage taught Rigveda to Pail, Yajurveda to Vaishampayana and Samaveda to Jamini and the disciple of that Matiman Vyasji named Sumantu became knowledgeable in Atharvaveda. 8-9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)