श्री विष्णु पुराण  »  अंश 3: तृतीय अंश  »  अध्याय 4: ऋग्वेदकी शाखाओंका विस्तार  »  श्लोक 25-26
 
 
श्लोक  3.4.25-26 
इत्येता: प्रतिशाखाभ्यो ह्यनुशाखा द्विजोत्तम।
बाष्कलश्चापरास्तिस्रस्संहिता: कृतवान‍्द्विज।
शिष्य: कालायनिर्गार्ग्यस्तृतीयश्च कथाजव:॥ २५॥
इत्येते बह्वृचा: प्रोक्ता: संहिता यै: प्रवर्तिता:॥ २६॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार वेदवृक्ष की उपशाखाओं से उसकी उपशाखाएँ उत्पन्न हुईं। हे द्विजश्रेष्ठ! बाष्कल ने तीन और संहिताएँ रचीं। उनके शिष्य [जिन्होंने उन संहिताओं को पढ़ा] कल्याणी, गार्ग्य और कथजव थे। इस प्रकार संहिताओं की रचना करने वाले बहवृच कहलाए।॥25-26॥
 
In this way, the sub-branches of the tree of Vedas originated from its sub-branches. O best of the two! Bashkala composed three more Samhitas. His disciples [who read those Samhitas] were Kalayani, Gargya and Kathajava. Thus, those who composed the Samhitas were called Bahvricha.॥25-26॥
 
इति श्रीविष्णुपुराणे तृतीयेंऽशे चतुर्थोऽध्याय:॥ ४॥
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)