श्री विष्णु पुराण  »  अंश 3: तृतीय अंश  »  अध्याय 4: ऋग्वेदकी शाखाओंका विस्तार  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  3.4.15 
सोऽयमेको यथा वेदस्तरुस्तेन पृथक् कृत:।
चतुर्धाथ ततो जातं वेदपादपकाननम्॥ १५॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार व्यासजी ने वेदरूपी एक वृक्ष को चार भागों में विभाजित किया और फिर उन चार भागों से वेदरूपी वृक्षों का एक वन उत्पन्न हुआ ॥15॥
 
In this manner Vyasa divided the one tree of Vedas into four parts. Then from these four divisions a forest of trees representing Vedas grew. ॥ 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)