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श्री विष्णु पुराण
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अंश 3: तृतीय अंश
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अध्याय 4: ऋग्वेदकी शाखाओंका विस्तार
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श्लोक 13
श्लोक
3.4.13
ततस्स ऋच उद्धृत्य ऋग्वेदं कृतवान्मुनि:।
यजूंषि च यजुर्वेदं सामवेदं च सामभि:॥ १३॥
अनुवाद
तत्पश्चात् उन्होंने ऋग्वेद, यजुर्वेद और सामश्रुतियों से सामवेद की रचना की।॥13॥
Thereafter he redeemed the Rg and Yaju Shrutis and composed the Rigveda and Yajurveda and the Samaveda from the Samashrutis.॥ 13॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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