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श्री विष्णु पुराण
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अंश 3: तृतीय अंश
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अध्याय 4: ऋग्वेदकी शाखाओंका विस्तार
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श्लोक 12
श्लोक
3.4.12
आध्वर्यवं यजुर्भिस्तु ऋग्भिर्होत्रं तथा मुनि:।
औद्गात्रं सामभिश्चक्रे ब्रह्मत्वं चाप्यथर्वभि:॥ १२॥
अनुवाद
व्यासजी ने यजुः से अध्वर्यु, ऋक्ष से होता, साम से उद्गाता और अथर्ववेद से ब्रह्मा के कर्म की स्थापना की। 12॥
Vyasji established the karma of Adhvaryu from Yaju, Hota from Rikse, Udgata from Sama and Brahma's karma from Atharvaveda. 12॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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