एक आसीद्यजुर्वेदस्तं चतुर्धा व्यकल्पयत्।
चातुर्होत्रमभूत्तस्मिंस्तेन यज्ञमथाकरोत्॥ ११॥
अनुवाद
पूर्वकाल में केवल एक ही यजुर्वेद था। उन्होंने उसे चार भागों में विभाजित किया, अतः उसमें चतुर्होत्र पद्धति अपनाई और इसी चतुर्होत्र पद्धति के अनुसार यज्ञ अनुष्ठानों की व्यवस्था की। 11.
In the past there was only one Yajurveda. He divided it into four parts, hence the Chaturhotra method was adopted in it and he arranged for Yagya rituals according to this Chaturhotra method. 11.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥