श्री विष्णु पुराण  »  अंश 3: तृतीय अंश  »  अध्याय 2: सावर्णिमनुकी उत्पत्ति तथा आगामी सात मन्वन्तरोंके मनु, मनुपुत्र, देवता, इन्द्र और सप्तर्षियोंका वर्णन  »  श्लोक 59
 
 
श्लोक  3.2.59 
वेदांस्तु द्वापरे व्यस्य कलेरन्ते पुनर्हरि:।
कल्किस्वरूपी दुर्वृत्तान्मार्गे स्थापयति प्रभु:॥ ५९॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार द्वापर युग में वेदों का विस्तार करके कलियुग के अन्त में भगवान् कल्कि रूप धारण करके दुष्टों को सन्मार्ग पर लाते हैं ॥59॥
 
In this manner, having expanded the Vedas in the Dvapar Yuga, at the end of the Kali Yuga the Lord takes the form of Kalki and leads the wicked people to the right path. ॥ 59॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas