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vishnu 3.2.52: हे विप्र! तब उत्पत्तिकर्ता सर्वव्यापी भगवान जनार्दन सम्पूर्ण त्रिलोकी को लीन करके अपनी माया में स्थित रहते हैं॥52॥   |   vishnu अध्याय 3.2: सावर्णिमनुकी उत्पत्ति तथा आगामी सात मन्वन्तरोंके मनु, मनुपुत्र, देवता, इन्द्र और सप्तर्षियोंका वर्णन   ।   vishnu अंश 3: तृतीय अंश   ।   श्री विष्णु पुराण Sri Vishnu Puran | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री विष्णु पुराण  »  अंश 3: तृतीय अंश  »  अध्याय 2: सावर्णिमनुकी उत्पत्ति तथा आगामी सात मन्वन्तरोंके मनु, मनुपुत्र, देवता, इन्द्र और सप्तर्षियोंका वर्णन  »  श्लोक 52
 
 
श्लोक  3.2.52 
त्रैलोक्यमखिलं ग्रस्त्वा भगवानादिकृद्विभु:।
स्वमायासंस्थितो विप्र सर्वभूतो जनार्दन:॥ ५२॥
 
 
अनुवाद
हे विप्र! तब उत्पत्तिकर्ता सर्वव्यापी भगवान जनार्दन सम्पूर्ण त्रिलोकी को लीन करके अपनी माया में स्थित रहते हैं॥52॥
 
Hey Vipra! Then the originator, the omnipresent omnipresent Lord Janardan, engulfs the entire Triloki and remains situated in his illusion. 52॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)