vedamrit
Reset
Home
ग्रन्थ
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
श्रीमद् भगवद गीता
______________
श्री विष्णु पुराण
श्रीमद् भागवतम
______________
श्रीचैतन्य भागवत
वैष्णव भजन
About
Contact
श्री विष्णु पुराण
»
अंश 3: तृतीय अंश
»
अध्याय 2: सावर्णिमनुकी उत्पत्ति तथा आगामी सात मन्वन्तरोंके मनु, मनुपुत्र, देवता, इन्द्र और सप्तर्षियोंका वर्णन
»
श्लोक 50
श्लोक
3.2.50
चतुर्दशभिरेतैस्तु गतैर्मन्वन्तरैर्द्विज।
सहस्रयुगपर्यन्त: कल्पो निश्शेष उच्यते॥ ५०॥
अनुवाद
हे द्विज! इन चौदह मन्वन्तरों के बीत जाने पर एक हजार युगों का एक कल्प समाप्त हुआ माना जाता है ॥50॥
O twice born! After the passing of these fourteen Manvantaras, a Kalpa lasting for a thousand Yugas is said to have ended. ॥ 50॥
✨ ai-generated
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas