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vishnu 3.2.50: हे द्विज! इन चौदह मन्वन्तरों के बीत जाने पर एक हजार युगों का एक कल्प समाप्त हुआ माना जाता है ॥50॥   |   vishnu अध्याय 3.2: सावर्णिमनुकी उत्पत्ति तथा आगामी सात मन्वन्तरोंके मनु, मनुपुत्र, देवता, इन्द्र और सप्तर्षियोंका वर्णन   ।   vishnu अंश 3: तृतीय अंश   ।   श्री विष्णु पुराण Sri Vishnu Puran | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री विष्णु पुराण  »  अंश 3: तृतीय अंश  »  अध्याय 2: सावर्णिमनुकी उत्पत्ति तथा आगामी सात मन्वन्तरोंके मनु, मनुपुत्र, देवता, इन्द्र और सप्तर्षियोंका वर्णन  »  श्लोक 50
 
 
श्लोक  3.2.50 
चतुर्दशभिरेतैस्तु गतैर्मन्वन्तरैर्द्विज।
सहस्रयुगपर्यन्त: कल्पो निश्शेष उच्यते॥ ५०॥
 
 
अनुवाद
हे द्विज! इन चौदह मन्वन्तरों के बीत जाने पर एक हजार युगों का एक कल्प समाप्त हुआ माना जाता है ॥50॥
 
O twice born! After the passing of these fourteen Manvantaras, a Kalpa lasting for a thousand Yugas is said to have ended. ॥ 50॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)