| श्री विष्णु पुराण » अंश 3: तृतीय अंश » अध्याय 2: सावर्णिमनुकी उत्पत्ति तथा आगामी सात मन्वन्तरोंके मनु, मनुपुत्र, देवता, इन्द्र और सप्तर्षियोंका वर्णन » श्लोक 47-48 |
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| | | | श्लोक 3.2.47-48  | कृते कृते स्मृतेर्विप्र प्रणेता जायते मनु:।
देवा यज्ञभुजस्ते तु यावन्मन्वन्तरं तु तत्॥ ४७॥
भवन्ति ये मनो: पुत्रा यावन्मन्वन्तरं तु तै:।
तदन्वयोद्भवैश्चैव तावद्भू: परिपाल्यते॥ ४८॥ | | | | | | अनुवाद | | प्रत्येक सत्ययुग के प्रारम्भ में स्मृतिशास्त्र के रचयिता मनु प्रकट होते हैं [मनुष्यों के धार्मिक मानदण्डों की स्थापना करने के लिए]; और उस मन्वन्तर के अन्त तक उस समय के देवता यज्ञों का भोग करते हैं तथा मनु के पुत्र और उनके वंशज मन्वन्तर के अन्त तक पृथ्वी का पालन करते रहते हैं ॥47-48॥ | | | | At the beginning of every Satyayuga, Manu, the author of Smriti-shastra, appears [to establish the religious standards of human beings]; And till the end of that Manvantara, the gods of that time enjoy the sacrifices and Manu's sons and their descendants continue to follow the earth till the end of Manvantara. 47-48॥ | | ✨ ai-generated | | |
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