| श्री विष्णु पुराण » अंश 3: तृतीय अंश » अध्याय 2: सावर्णिमनुकी उत्पत्ति तथा आगामी सात मन्वन्तरोंके मनु, मनुपुत्र, देवता, इन्द्र और सप्तर्षियोंका वर्णन » श्लोक 44 |
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| | | | श्लोक 3.2.44  | अग्निबाहु: शुचि: शुक्रो मागधोऽग्निध्र एव च।
युक्तस्तथा जितश्चान्यो मनुपुत्रानत: शृणु॥ ४४॥ | | | | | | अनुवाद | | उस समय अग्निबाहु, शुचि, शुक्र, मगध, आग्नीघ्र, युक्त और जित- ये सात ऋषि होंगे। अब मनुपुत्रों के बारे में सुनिए. 44॥ | | | | At that time, Agnibahu, Shuchi, Shukra, Magadh, Agnidhra, Yukta and Jit – these seven sages will be there. Now listen about Manuputras. 44॥ | | ✨ ai-generated | | |
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