श्री विष्णु पुराण  »  अंश 3: तृतीय अंश  »  अध्याय 2: सावर्णिमनुकी उत्पत्ति तथा आगामी सात मन्वन्तरोंके मनु, मनुपुत्र, देवता, इन्द्र और सप्तर्षियोंका वर्णन  »  श्लोक 42-43
 
 
श्लोक  3.2.42-43 
भौमश्चतुर्दशश्चात्र मैत्रेय भविता मनु:।
शुचिरिन्द्र: सुरगणास्तत्र पञ्च शृणुष्व तान्॥ ४२॥
चाक्षुषाश्च पवित्राश्च कनिष्ठा भ्राजिकास्तथा।
वाचावृद्धाश्च वै देवास्सप्तर्षीनपि मे शृणु॥ ४३॥
 
 
अनुवाद
हे मैत्रेय! चौदहवें मनु भौम होंगे। उस समय शुचि नामक एक इन्द्र और पाँच देवता होंगे; उनके नाम सुनो - वे चाक्षुष, पवित्र, कनिष्ठ, भ्राजिक और वाचावृद्ध नामक देवता हैं। अब उस समय के सप्तर्षियों के नाम सुनो ॥ 42-43॥
 
O Maitreya! The fourteenth Manu will be Bhauma. At that time there will be an Indra named Shuchi and five gods; listen to their names - they are the gods named Chakshus, Pavitr, Kanishtha, Bhrajik and Vachavriddha. Now listen to the names of the Saptarishis of that time. ॥ 42-43॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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