श्री विष्णु पुराण  »  अंश 3: तृतीय अंश  »  अध्याय 2: सावर्णिमनुकी उत्पत्ति तथा आगामी सात मन्वन्तरोंके मनु, मनुपुत्र, देवता, इन्द्र और सप्तर्षियोंका वर्णन  »  श्लोक 37-39
 
 
श्लोक  3.2.37-39 
त्रयोदशो रुचिर्नामा भविष्यति मुने मनु:॥ ३७ ॥
सुत्रामाण: सुकर्माण: सुधर्माणस्तथामरा:।
त्रयस्त्रिंशद्विभेदास्ते देवानां यत्र वै गणा:॥ ३८ ॥
दिवस्पतिर्महावीर्यस्तेषामिन्द्रो भविष्यति॥ ३९ ॥
 
 
अनुवाद
हे मुने! तेरहवें मन्वन्तर में रुचि नामक मनु होंगे। इस मन्वन्तर में सुत्रमा, सुकर्मा और सुधर्मा नामक देवता होंगे, जिनमें से प्रत्येक के तैंतीस देवता होंगे; और उनके पराक्रमी दिन के स्वामी इन्द्र होंगे। 37-39॥
 
Hey Mune! The thirteenth will be Manu named Ruchi. In this Manvantara, there will be gods named Sutrama, Sukarma and Sudharma, each of them will have thirty-three gods; And their mighty day lord will be Indra. 37-39॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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