| श्री विष्णु पुराण » अंश 3: तृतीय अंश » अध्याय 2: सावर्णिमनुकी उत्पत्ति तथा आगामी सात मन्वन्तरोंके मनु, मनुपुत्र, देवता, इन्द्र और सप्तर्षियोंका वर्णन » श्लोक 34 |
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| | | | श्लोक 3.2.34  | हरिता रोहिता देवास्तथा सुमनसो द्विज।
सुकर्माण: सुरापाश्च दशका: पञ्च वै गणा:॥ ३४॥ | | | | | | अनुवाद | | हे द्विजों, उस समय दस-दस देवताओं के हारित, रोहित, सुमना, सुकर्मा और सुरप नामक पाँच गण होंगे ॥ 34॥ | | | | O twice born, at that time there will be five Ganas named Harit, Rohit, Sumana, Sukarma and Surap of ten gods each. ॥ 34॥ | | ✨ ai-generated | | |
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