श्री विष्णु पुराण  »  अंश 3: तृतीय अंश  »  अध्याय 2: सावर्णिमनुकी उत्पत्ति तथा आगामी सात मन्वन्तरोंके मनु, मनुपुत्र, देवता, इन्द्र और सप्तर्षियोंका वर्णन  »  श्लोक 31-32
 
 
श्लोक  3.2.31-32 
नि:स्वरश्चाग्नितेजाश्च वपुष्मान्घृणिरारुणि:।
हविष्माननघश्चैव भाव्या: सप्तर्षयस्तथा॥ ३१॥
सर्वत्रगस्सुधर्मा च देवानीकादयस्तथा।
भविष्यन्ति मनोस्तस्य तनया: पृथिवीश्वरा:॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
उस समय उपस्थित सात ऋषियों के नाम निःस्वर, अग्नितेज, वपुष्मान्, घृणि, आरुणि, हविष्मान् और अनघ हैं। तथा सर्वत्रग, सुधर्मा और देवानीक आदि धर्मसावर्णि मनु के पुत्र उस समय पृथ्वी के शासक होंगे। 31-32॥
 
The names of the seven sages present at that time are Nihswar, Agniteja, Vapushman, Ghrini, Aruni, Havishman and Anagha. And the sons of Dharmasavarni Manu like Sarvatraga, Sudharma and Devanika etc. will be the rulers of the earth at that time. 31-32॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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