| श्री विष्णु पुराण » अंश 3: तृतीय अंश » अध्याय 2: सावर्णिमनुकी उत्पत्ति तथा आगामी सात मन्वन्तरोंके मनु, मनुपुत्र, देवता, इन्द्र और सप्तर्षियोंका वर्णन » श्लोक 17 |
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| | | | श्लोक 3.2.17  | दीप्तिमान्गालवो राम: कृपो द्रौणिस्तथा पर:।
मत्पुत्रश्च तथा व्यास ऋष्यशृङ्गश्च सप्तम:॥ १७॥ | | | | | | अनुवाद | | उस समय दीप्तिमान, गालव, राम, कृपाचार्य, द्रोणपुत्र अश्वत्थामा, मेरे पुत्र व्यास और सातवें ऋषिश्रृंग - ये ही सप्तर्षि होंगे ॥17॥ | | | | At that time, Diptiman, Galava, Ram, Kripa, Drona's son Ashwatthama, my son Vyas and the seventh Rishisringa - these will be the seven sages. 17॥ | | ✨ ai-generated | | |
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