| श्री विष्णु पुराण » अंश 3: तृतीय अंश » अध्याय 2: सावर्णिमनुकी उत्पत्ति तथा आगामी सात मन्वन्तरोंके मनु, मनुपुत्र, देवता, इन्द्र और सप्तर्षियोंका वर्णन » श्लोक 11-12 |
|
| | | | श्लोक 3.2.11-12  | त्वष्टैव तेजसा तेन विष्णोश्चक्रमकल्पयत्।
त्रिशूलं चैव शर्वस्य शिबिकां धनदस्य च॥ ११॥
शक्तिं गुहस्य देवानामन्येषां च यदायुधम्।
तत्सर्वं तेजसा तेन विश्वकर्मा व्यवर्धयत्॥ १२॥ | | | | | | अनुवाद | | विश्वकर्मा ने उस पृथ्वी पर गिरे सूर्य के तेज से भगवान विष्णु का चक्र, शंकर का त्रिशूल, कुबेर का विमान, कार्तिकेय की शक्ति उत्पन्न की तथा उससे अन्य देवताओं के समस्त अस्त्र-शस्त्रों को भी सुदृढ़ किया ॥11-12॥ | | | | Vishwakarma created Lord Vishnu's discus, Shankar's trident, Kuber's plane, Kartikeya's power from the sun's glory that fell on that earth and also strengthened all the weapons of other gods with it. 11-12॥ | | ✨ ai-generated | | |
|
|