श्री विष्णु पुराण  »  अंश 3: तृतीय अंश  »  अध्याय 2: सावर्णिमनुकी उत्पत्ति तथा आगामी सात मन्वन्तरोंके मनु, मनुपुत्र, देवता, इन्द्र और सप्तर्षियोंका वर्णन  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  3.2.1 
श्रीमैत्रेय उवाच
प्रोक्तान्येतानि भवता सप्तमन्वन्तराणि वै।
भविष्याण्यपि विप्रर्षे ममाख्यातुं त्वमर्हसि॥ १॥
 
 
अनुवाद
श्री मैत्रेयजी बोले - हे विप्रर्ष! आपने मुझे पूर्व के सात मन्वन्तरों की कथा सुनाई, अब कृपा करके आगामी मन्वन्तरों के विषय में भी कहिए। 1॥
 
Shri Maitreyaji said – O Viprarsha! You told me the story of the seven past Manvantaras, now please tell me about the upcoming Manvantaras also. 1॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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