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श्री विष्णु पुराण
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अंश 3: तृतीय अंश
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अध्याय 18: मायामोह और असुरोंका संवाद तथा राजा शतधनुकी कथा
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श्लोक 91
श्लोक
3.18.91
इयाज यज्ञान्सुबहून्ददौ दानानि चार्थिनाम्।
पुत्रानुत्पादयामास युयुधे च सहारिभि:॥ ९१॥
अनुवाद
उसने अनेक यज्ञ किये, भिखारियों को अनेक दान दिये, अनेक पुत्र उत्पन्न किये और शत्रुओं के साथ अनेक युद्ध किये॥91॥
He performed many sacrifices, gave various gifts to beggars, produced many sons and fought many wars with his enemies.॥91॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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