श्री विष्णु पुराण  »  अंश 3: तृतीय अंश  »  अध्याय 18: मायामोह और असुरोंका संवाद तथा राजा शतधनुकी कथा  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  3.18.8 
श्रीपराशर उवाच
एवंप्रकारैर्बहुभिर्युक्तिदर्शनचर्चितै:।
मायामोहेन ते दैत्या वेदमार्गादपाकृता:॥ ८॥
 
 
अनुवाद
श्री पराशर बोले - इस प्रकार अनेक प्रकार के छल-कपट और अतिशयोक्तिपूर्ण कथनों से माया और मोहित राक्षस वैदिक मार्ग से विचलित हो गए।
 
Shri Parashara said - In this manner, by various kinds of tricks and exaggerated statements, Maya and the deluded demons deviated from the Vedic path.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)