श्री विष्णु पुराण  »  अंश 3: तृतीय अंश  »  अध्याय 18: मायामोह और असुरोंका संवाद तथा राजा शतधनुकी कथा  »  श्लोक 76
 
 
श्लोक  3.18.76 
पुनस्तयोक्तं स ज्ञात्वा सत्यं सत्यवतां वर:।
कानने स निराहारस्तत्याज स्वं कलेवरम्॥ ७६॥
 
 
अनुवाद
तब सत्यव्रतियों में श्रेष्ठ राजा शतधनु ने उसकी यह बात सुनकर सारा सच जान लिया और बिना कुछ खाए ही वन में शरीर त्याग दिया ॥ 76॥
 
Then King Shatadhanu, the best among truthful persons, after hearing him say this, understood the whole truth and left his body in the forest without any food. ॥ 76॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)