श्री विष्णु पुराण  »  अंश 3: तृतीय अंश  »  अध्याय 18: मायामोह और असुरोंका संवाद तथा राजा शतधनुकी कथा  »  श्लोक 71
 
 
श्लोक  3.18.71 
श्रीपराशर उवाच
तयैवं स्मारिते तस्मिन्पूर्वजातिकृते तदा।
दध्यौ चिरमथावाप निर्वेदमतिदुर्लभम्॥ ७१॥
 
 
अनुवाद
श्री पराशर जी बोले - जब काशीराज की पुत्री ने उन्हें इस प्रकार स्मरण कराया, तब उन्होंने बहुत देर तक अपने पूर्वजन्म का चिंतन किया, तब उन्हें अत्यंत दुर्लभ वैराग्य की प्राप्ति हुई।
 
Shri Parashar Ji said - When Kashiraj's daughter reminded him in this manner, he contemplated over his previous life for a long time. Then he attained a very rare detachment.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)