श्री विष्णु पुराण  »  अंश 3: तृतीय अंश  »  अध्याय 18: मायामोह और असुरोंका संवाद तथा राजा शतधनुकी कथा  »  श्लोक 67
 
 
श्लोक  3.18.67 
भुञ्जन्दत्तं तया सोऽन्नमतिमृष्टमभीप्सितम्।
स्वजातिललितं कुर्वन्बहु चाटु चकार वै॥ ६७॥
 
 
अनुवाद
उसके द्वारा दिया गया अत्यन्त मधुर एवं मनभावन भोजन खाकर वह अपनी जाति के अनुरूप नाना प्रकार की चापलूसी करने लगा।
 
Having eaten the very sweet and desirable food offered by him, he began to display various kinds of flattery befitting his caste. 67.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)