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श्री विष्णु पुराण
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अंश 3: तृतीय अंश
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अध्याय 18: मायामोह और असुरोंका संवाद तथा राजा शतधनुकी कथा
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श्लोक 65
श्लोक
3.18.65
ततस्सा दिव्यया दृष्टॺा दृष्ट्वा श्वानं निजं पतिम्।
विदिशाख्यं पुरं गत्वा तदवस्थं ददर्श तम्॥ ६५॥
अनुवाद
तब दिव्य दृष्टि से उसने देखा कि उसका पति कुत्ता बन गया है और वह विदिशा नामक नगर में गई और वहाँ उसे कुत्ते की अवस्था में देखा।
Then with a divine sight she perceived that her husband had become a dog and went to a city called Vidisha and saw him there in the state of a dog.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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