श्री विष्णु पुराण  »  अंश 3: तृतीय अंश  »  अध्याय 18: मायामोह और असुरोंका संवाद तथा राजा शतधनुकी कथा  »  श्लोक 58
 
 
श्लोक  3.18.58 
चापाचार्यस्य तस्यासौ सखा राज्ञो महात्मन:।
अतस्त द‍्ग ौरवात्तेन सखाभावमथाकरोत्॥ ५८ ॥
 
 
अनुवाद
यह ब्राह्मण उस महान राजा के धनुर्धर गुरु का मित्र था; अतः गुरु के अभिमान के कारण राजा भी उसके साथ मित्र जैसा व्यवहार करता था।
 
This Brahmin was a friend of the archer teacher of that great king; therefore, out of pride in the teacher, the king also treated him like a friend. 58.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)