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श्री विष्णु पुराण
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अंश 3: तृतीय अंश
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अध्याय 18: मायामोह और असुरोंका संवाद तथा राजा शतधनुकी कथा
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श्लोक 54
श्लोक
3.18.54
पतिव्रता महाभागा सत्यशौचदयान्विता।
सर्वलक्षणसम्पन्ना विनयेन नयेन च॥ ५४॥
अनुवाद
वह महाभाग भक्ति, सत्य, शुचिता और दया से युक्त था तथा शील, नीति आदि समस्त उत्तम गुणों से युक्त था ॥54॥
That Mahabhaga was full of devotion, truth, cleanliness and kindness and was endowed with all the good qualities like modesty and ethics etc. 54॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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