vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री विष्णु पुराण
»
अंश 3: तृतीय अंश
»
अध्याय 18: मायामोह और असुरोंका संवाद तथा राजा शतधनुकी कथा
»
श्लोक 5
श्लोक
3.18.5
मायामोह उवाच
कुरुध्वं मम वाक्यानि यदि मुक्तिमभीप्सथ।
अर्हध्वमेनं धर्मं च मुक्तिद्वारमसंवृतम्॥ ५॥
अनुवाद
मायामोह ने कहा, "यदि तुम सब मोक्ष चाहते हो, तो जैसा मैं कहता हूँ वैसा ही करो। तुम सब इस धर्म का सम्मान करो, क्योंकि यह मोक्ष का द्वार है।" ॥5॥
Maya-moha said, "If you all desire salvation, then do as I say. You all should respect this religion as the open door to salvation." ॥5॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×