श्री विष्णु पुराण  »  अंश 3: तृतीय अंश  »  अध्याय 18: मायामोह और असुरोंका संवाद तथा राजा शतधनुकी कथा  »  श्लोक 47
 
 
श्लोक  3.18.47 
देवतापितृभूतानि तथानभ्यर्च्य योऽतिथीन्।
भुङ्‍क्ते स पातकं भुङ्‍क्ते निष्कृतिस्तस्य नेष्यते॥ ४७॥
 
 
अनुवाद
जो मनुष्य देवता, पितरों, भूतों और अतिथियों का पूजन किए बिना भोजन करता है, वह पापमय अन्न खाता है; वह उत्तम गति को प्राप्त नहीं कर सकता ॥47॥
 
A person who eats without worshipping the gods, ancestors, ghosts and guests, eats sinful food; he cannot attain a good destination. ॥ 47॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)