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श्री विष्णु पुराण
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अंश 3: तृतीय अंश
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अध्याय 18: मायामोह और असुरोंका संवाद तथा राजा शतधनुकी कथा
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श्लोक 46
श्लोक
3.18.46
अथ भुङ्क्ते गृहे तस्य करोत्यास्यां तथासने।
शेते चाप्येकशयने स सद्यस्तत्समो भवेत्॥ ४६॥
अनुवाद
जो मनुष्य उसके घर में भोजन करता है, उसके साथ आसन ग्रहण करता है अथवा उसके साथ एक ही शय्या पर शयन करता है, वह शीघ्र ही उसके समान हो जाता है ॥46॥
A man who takes his meal in his house, takes his seat or sleeps on the same bed with him soon becomes like him. ॥ 46॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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