श्री विष्णु पुराण  »  अंश 3: तृतीय अंश  »  अध्याय 18: मायामोह और असुरोंका संवाद तथा राजा शतधनुकी कथा  »  श्लोक 44
 
 
श्लोक  3.18.44 
सम्भाषणानुप्रश्नादि सहास्यां चैव कुर्वत:।
जायते तुल्यता तस्य तेनैव द्विज वत्सरात्॥ ४४॥
 
 
अनुवाद
हे ब्राह्मण! ऐसे व्यक्ति के साथ एक वर्ष तक बैठकर, बातचीत करके, कुशलक्षेम पूछकर मनुष्य उसके समान ही पापी हो जाता है ॥ 44॥
 
O Brahmin! By talking, inquiring about the well-being and sitting with such a person for one year, a person becomes as sinful as him. ॥ 44॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)