श्री विष्णु पुराण  »  अंश 3: तृतीय अंश  »  अध्याय 18: मायामोह और असुरोंका संवाद तथा राजा शतधनुकी कथा  »  श्लोक 42
 
 
श्लोक  3.18.42 
स्पृष्टे स्नानं सचैलस्य शुद्धेर्हेतुर्महामते।
पुंसो भवति तस्योक्ता न शुद्धि: पापकर्मण:॥ ४२॥
 
 
अनुवाद
हे महात्मन! यदि कोई ऐसे व्यक्ति के सम्पर्क में आ जाए तो वस्त्र सहित स्नान करके पवित्र हो सकता है, परन्तु वह पापात्मा किसी भी प्रकार से पवित्र नहीं हो सकता ॥42॥
 
O great man! If one comes in contact with such a person, one can purify oneself by taking a bath with the clothes on, but that sinful soul cannot be purified by any means. ॥ 42॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)