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श्री विष्णु पुराण
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अंश 3: तृतीय अंश
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अध्याय 18: मायामोह और असुरोंका संवाद तथा राजा शतधनुकी कथा
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श्लोक 41
श्लोक
3.18.41
संवत्सरं क्रियाहानिर्यस्य पुंसोऽभिजायते।
तस्यावलोकनात्सूर्यो निरीक्ष्यस्साधुभिस्सदा॥ ४१॥
अनुवाद
यदि एक वर्ष तक नित्य कर्म न करने वाले मनुष्य पर दृष्टि पड़ जाए, तो साधु पुरुष को सदैव सूर्य का दर्शन करना चाहिए ॥41॥
If the eyes fall on a person who does not do daily activities for a year, then a saintly person should always see the sun. 41॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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