श्री विष्णु पुराण  »  अंश 3: तृतीय अंश  »  अध्याय 18: मायामोह और असुरोंका संवाद तथा राजा शतधनुकी कथा  »  श्लोक 40
 
 
श्लोक  3.18.40 
प्रायश्चित्तेन महता शुद्धिमाप्नोत्यनापदि।
पक्षं नित्यक्रियाहाने: कर्त्ता मैत्रेय मानव:॥ ४०॥
 
 
अनुवाद
हे मैत्रेय! जो मनुष्य आपत्तिकाल को छोड़कर किसी भी समय एक पखवाड़े तक अपने दैनिक कर्मों का परित्याग कर देता है, वह महान प्रायश्चित से ही शुद्ध हो सकता है ॥40॥
 
O Maitreya! A person who abandons his daily duties for a fortnight at any time, except in times of emergency, can become pure only by great atonement. ॥ 40॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)