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श्री विष्णु पुराण
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अंश 3: तृतीय अंश
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अध्याय 18: मायामोह और असुरोंका संवाद तथा राजा शतधनुकी कथा
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श्लोक 38
श्लोक
3.18.38
यस्तु सन्त्यज्य गार्हस्थ्यं वानप्रस्थो न जायते।
परिव्राट् चापि मैत्रेय स नग्न: पापकृन्नर:॥ ३८॥
अनुवाद
हे मैत्रेय! जो मनुष्य गृहस्थ जीवन त्यागकर वानप्रस्थ या संन्यासी नहीं बनता, वह नंगा होने के साथ-साथ पापी भी है ॥38॥
O Maitreya! The man who does not become a Vanaprastha or a Sanyasi after leaving the household life is a sinner as well as a naked man. ॥ 38॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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