श्री विष्णु पुराण  »  अंश 3: तृतीय अंश  »  अध्याय 18: मायामोह और असुरोंका संवाद तथा राजा शतधनुकी कथा  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  3.18.32 
श्रीपराशर उवाच
मायामोहेन ते दैत्या: प्रकारैर्बहुभिस्तथा।
व्युत्थापिता यथा नैषां त्रयी कश्चिदरोचयत्॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
श्री पराशर जी बोले - इस प्रकार माया और मोह ने अनेक युक्तियों से दैत्यों को विचलित कर दिया, जिससे उनमें से किसी को भी तीनों वेदों में कोई रुचि नहीं रही ॥32॥
 
Shri Parashar Ji said - In this way, Maya and the Moha distracted the demons with many tricks due to which none of them had any interest in the three Vedas. ॥ 32॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)