श्री विष्णु पुराण  »  अंश 3: तृतीय अंश  »  अध्याय 18: मायामोह और असुरोंका संवाद तथा राजा शतधनुकी कथा  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  3.18.28 
निहतस्य पशोर्यज्ञे स्वर्गप्राप्तिर्यदीष्यते।
स्वपिता यजमानेन किन्नु तस्मान्न हन्यते॥ २८॥
 
 
अनुवाद
यदि यज्ञ में बलि दिया गया पशु स्वर्ग को प्राप्त होता है तो यजमान अपने पिता को क्यों नहीं मार डालता? 28॥
 
If the animal sacrificed in a yagya attains heaven then why doesn't the host kill his own father? 28॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)