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श्री विष्णु पुराण
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अंश 3: तृतीय अंश
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अध्याय 18: मायामोह और असुरोंका संवाद तथा राजा शतधनुकी कथा
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श्लोक 21
श्लोक
3.18.21
नानाप्रकारवचनं स तेषां युक्तियोजितम्।
तथा तथा त्रयीधर्मं तत्यजुस्ते यथा यथा॥ २१॥
अनुवाद
मायामोह ने ऐसे ज्ञानपूर्ण वचन कहे, जिनके प्रभाव से उन राक्षसों ने त्रिधर्म का परित्याग कर दिया ॥21॥
Mayamoha uttered such wise sentences due to which those demons abandoned the Triadharma. 21॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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