श्री विष्णु पुराण  »  अंश 3: तृतीय अंश  »  अध्याय 18: मायामोह और असुरोंका संवाद तथा राजा शतधनुकी कथा  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  3.18.17 
स्वर्गार्थं यदि वो वाञ्छा निर्वाणार्थमथासुरा:।
तदलं पशुघातादिदुष्टधर्मैर्निबोधत॥ १७॥
 
 
अनुवाद
"हे असुरगण! यदि तुम स्वर्ग या मोक्ष चाहते हो, तो पशु हिंसा आदि बुरे कर्मों का त्याग करके आत्मज्ञान प्राप्त करो॥17॥
 
“O Asurgan! If you desire heaven or salvation, then attain enlightenment by renouncing evil deeds like animal violence etc. 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)