श्री विष्णु पुराण  »  अंश 3: तृतीय अंश  »  अध्याय 18: मायामोह और असुरोंका संवाद तथा राजा शतधनुकी कथा  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  3.18.13 
अर्हतैतं महाधर्मं मायामोहेन ते यत:।
प्रोक्तास्तमाश्रिता धर्ममार्हतास्तेन तेऽभवन्॥ १३॥
 
 
अनुवाद
मायामोह ने दैत्यों से कहा था कि वे इस महान धर्म का 'अर्हत्' रूप में आदर करें। अतः उस धर्म का पालन करने से वे 'अर्हत्' कहलाए॥13॥
 
Mayamoha had told the demons that they should respect this great religion as 'Arhat'. So by following that religion, they were called 'Arhat'.॥13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)