श्री विष्णु पुराण  »  अंश 3: तृतीय अंश  »  अध्याय 18: मायामोह और असुरोंका संवाद तथा राजा शतधनुकी कथा  »  श्लोक 103
 
 
श्लोक  3.18.103 
एते नग्नास्तवाख्याता दृष्टा: श्राद्धोपघातका:।
येषां सम्भाषणात्पुंसां दिनपुण्यं प्रणश्यति॥ १०३॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार मैंने तुमसे उन नग्न मनुष्यों के विषय में कहा, जिनके दर्शनमात्र से श्राद्ध नष्ट हो जाता है और जिनके साथ वार्तालाप करने से मनुष्य का एक दिन का भी पुण्य नष्ट हो जाता है ॥103॥
 
In this way, I explained to you about the naked people, whose mere sight destroys the Shraddha and whose conversation with them reduces a person's good deeds for even one day. 103॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)