श्री विष्णु पुराण  »  अंश 3: तृतीय अंश  »  अध्याय 18: मायामोह और असुरोंका संवाद तथा राजा शतधनुकी कथा  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  3.18.1 
श्रीपराशर उवाच
तपस्यभिरतान्सोऽथ मायामोहो महासुरान्।
मैत्रेय ददृशे गत्वा नर्मदातीरसंश्रितान्॥ १॥
 
 
अनुवाद
श्री पराशरजी बोले - हे मैत्रेय! तत्पश्चात मायामोह ने देवताओं के साथ जाकर देखा कि राक्षस नर्मदा के तट पर तपस्या में लगे हुए हैं॥1॥
 
Shri Parasharji said – O Maitreya! Thereafter Mayamoha went [along with the gods] and saw that the demons were engaged in penance on the banks of Narmada. 1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)