vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री विष्णु पुराण
»
अंश 3: तृतीय अंश
»
अध्याय 17: नग्नविषयक प्रश्न, देवताओंका पराजय, उनका भगवान्की शरणमें जाना और भगवान्का मायामोहको प्रकट करना
»
श्लोक 7
श्लोक
3.17.7
इदं च श्रूयतामन्यद्यद्भीष्माय महात्मने।
कथयामास धर्मज्ञो वसिष्ठोऽस्मत्पितामह:॥ ७॥
अनुवाद
इस विषय में हमारे पितामह महात्मा धर्मज्ञ ऋषि वशिष्ठजी ने महात्मा भीष्मजी से जो कुछ कहा था, उसे सुनो॥7॥
Listen to whatever our grandfather, the great religious sage Vashishthaji, had said to Mahatma Bhishmaji in this regard. 7॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×