श्री विष्णु पुराण  »  अंश 3: तृतीय अंश  »  अध्याय 17: नग्नविषयक प्रश्न, देवताओंका पराजय, उनका भगवान‍्की शरणमें जाना और भगवान‍्का मायामोहको प्रकट करना  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  3.17.7 
इदं च श्रूयतामन्यद्यद्भीष्माय महात्मने।
कथयामास धर्मज्ञो वसिष्ठोऽस्मत्पितामह:॥ ७॥
 
 
अनुवाद
इस विषय में हमारे पितामह महात्‍मा धर्मज्ञ ऋषि वशिष्ठजी ने महात्‍मा भीष्‍मजी से जो कुछ कहा था, उसे सुनो॥7॥
 
Listen to whatever our grandfather, the great religious sage Vashishthaji, had said to Mahatma Bhishmaji in this regard. 7॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas