श्री विष्णु पुराण  »  अंश 3: तृतीय अंश  »  अध्याय 17: नग्नविषयक प्रश्न, देवताओंका पराजय, उनका भगवान‍्की शरणमें जाना और भगवान‍्का मायामोहको प्रकट करना  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  3.17.6 
त्रयी समस्तवर्णानां द्विज संवरणं यत:।
नग्नो भवत्युज्झितायामतस्तस्यां न संशय:॥ ६॥
 
 
अनुवाद
हे ब्रह्मन्! सम्पूर्ण वर्णों का आवरण (वस्त्र) वेदत्रयी ही है; अतः उसे त्यागकर मनुष्य 'नग्न' हो जाता है, इसमें कोई संदेह नहीं है। 6॥
 
Hey Brahman! The covering (clothing) of all the varnas is Vedatrayee only; Therefore, after abandoning her, the man becomes 'naked', there is no doubt about it. 6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)