श्री विष्णु पुराण  »  अंश 3: तृतीय अंश  »  अध्याय 17: नग्नविषयक प्रश्न, देवताओंका पराजय, उनका भगवान‍्की शरणमें जाना और भगवान‍्का मायामोहको प्रकट करना  »  श्लोक 45
 
 
श्लोक  3.17.45 
श्रीपराशर उवाच
इत्युक्ता: प्रणिपत्यैनं ययुर्देवा यथागतम्।
मायामोहोऽपि तैस्सार्द्धं ययौ यत्र महासुरा:॥ ४५॥
 
 
अनुवाद
श्री पराशर बोले - भगवान् का ऐसा आदेश पाकर देवतागण उन्हें प्रणाम करके वहीं चले गए जहाँ से वे आए थे। उनके साथ माया-मोह भी वहाँ गया जहाँ असुर थे।
 
Sri Parashara said - On receiving such an order from the Lord, the gods bowed before Him and went back to where they had come from. Along with them, Maya-moha also went to where the demons were.
 
इति श्रीविष्णुपुराणे तृतीयेंऽशे सप्तदशोऽध्याय:॥ १७॥
 
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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