श्री विष्णु पुराण  »  अंश 3: तृतीय अंश  »  अध्याय 17: नग्नविषयक प्रश्न, देवताओंका पराजय, उनका भगवान‍्की शरणमें जाना और भगवान‍्का मायामोहको प्रकट करना  »  श्लोक 43
 
 
श्लोक  3.17.43 
स्थितौ स्थितस्य मे वध्या यावन्त: परिपन्थिन:।
ब्रह्मणो ह्यधिकारस्य देवदैत्यादिका: सुरा:॥ ४३॥
 
 
अनुवाद
हे देवताओं! जो भी देवता या दैत्य ब्रह्माजी के कार्य में बाधा डालते हैं, वे सृष्टि की रक्षा के लिए मेरे द्वारा मारे जाने को तैयार हैं॥43॥
 
O gods! Any god or demon who hinders the work of Lord Brahma, they are ready to be killed by me in order to protect the universe. 43॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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