श्री विष्णु पुराण  »  अंश 3: तृतीय अंश  »  अध्याय 17: नग्नविषयक प्रश्न, देवताओंका पराजय, उनका भगवान‍्की शरणमें जाना और भगवान‍्का मायामोहको प्रकट करना  »  श्लोक 41
 
 
श्लोक  3.17.41 
श्रीपराशर उवाच
इत्युक्तो भगवांस्तेभ्यो मायामोहं शरीरत:।
समुत्पाद्य ददौ विष्णु: प्राह चेदं सुरोत्तमान्॥ ४१॥
 
 
अनुवाद
श्री पराशरजी बोले - उनके ऐसा कहने पर भगवान विष्णु ने अपने शरीर से माया उत्पन्न करके देवताओं को दे दी और कहा - ॥41॥
 
Shri Parasharji said - On his saying so, Lord Vishnu created illusion from his body and gave it to the gods and said - ॥ 41॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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