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श्री विष्णु पुराण
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अंश 3: तृतीय अंश
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अध्याय 17: नग्नविषयक प्रश्न, देवताओंका पराजय, उनका भगवान्की शरणमें जाना और भगवान्का मायामोहको प्रकट करना
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श्लोक 38
श्लोक
3.17.38
यद्यप्यशेषभूतस्य वयं ते च तवांशजा:।
तथाप्यविद्याभेदेन भिन्नं पश्यामहे जगत्॥ ३८॥
अनुवाद
यद्यपि हम और वे ब्रह्माण्ड के अंग हैं, फिर भी अज्ञान के कारण हम संसार को एक-दूसरे से भिन्न देखते हैं ॥38॥
Although we and they are part of the universe, yet due to ignorance we see the world as different from each other. 38॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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