श्री विष्णु पुराण  »  अंश 3: तृतीय अंश  »  अध्याय 17: नग्नविषयक प्रश्न, देवताओंका पराजय, उनका भगवान‍्की शरणमें जाना और भगवान‍्का मायामोहको प्रकट करना  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  3.17.37 
त्रैलोक्ययज्ञभागाश्च दैत्यैर्ह्रादपुरोगमै:।
हृता नो ब्रह्मणोऽप्याज्ञामुल्लङ‍‍्घ्य परमेश्वर॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
हे भगवन्! भयंकर दैत्यों ने ब्रह्माजी की आज्ञा का उल्लंघन करके हमारा तथा त्रिलोकी के यज्ञों का अपहरण कर लिया है॥37॥
 
O God! The fierce demons have violated the orders of Lord Brahma and kidnapped us and the sacrificial offerings of Triloki. 37॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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